Home उत्तराखण्ड उत्तराखंड के ग्रामीण बाजारों को नई दिशा देगा सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर, सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर पहल से उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सशक्त विस्तार

उत्तराखंड के ग्रामीण बाजारों को नई दिशा देगा सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर, सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर पहल से उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सशक्त विस्तार

by Skgnews

देहरादून : उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक संगठित बाजार व्यवस्था पहुंचाने के उद्देश्य से सीएससी उत्तराखंड द्वारा “सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर” के माध्यम से एक महत्वपूर्ण एवं समावेशी पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल के अंतर्गत राज्य के निर्माताओं, वितरकों, एमएसएमई इकाइयों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी बाजारों में विस्तार हेतु एक सुदृढ़ एवं संरचित मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

सीएससी नेटवर्क के माध्यम से देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा सहित राज्य के अन्य पर्वतीय एवं दुर्गम जनपदों में उत्पादों की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। यह नेटवर्क प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सक्रिय है, जिससे उत्पादकों एवं ब्रांड्स को एक विश्वसनीय, पारदर्शी तथा संगठित वितरण प्रणाली उपलब्ध होगी।

सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर के अंतर्गत उपभोक्ता एफएमसीजी उत्पाद, डेयरी एवं कृषि उत्पाद, ऑर्गेनिक वस्तुएं, स्थानीय उत्तराखंडी ब्रांड्स तथा एसएचजी एवं एफपीओ द्वारा निर्मित उत्पादों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा, वहीं किसान उत्पादक संगठनों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का सशक्त अवसर प्राप्त होगा।

यह पहल जहां एक ओर उद्योगों को ग्रामीण बाजारों में विस्तार का अवसर प्रदान करेगी, वहीं दूसरी ओर एसएचजी, एफपीओ एवं स्थानीय उद्यमियों के माध्यम से स्वरोजगार, आय संवर्धन तथा सामुदायिक आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति प्रदान करेगी।

इस संबंध में सीएससी उत्तराखण्ड के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक चौहान ने बताया कि यह पहल राज्य के व्यवसायों, स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों को बिना भारी निवेश के एक सशक्त वितरण नेटवर्क से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सीएससी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता में वृद्धि होगी, स्थानीय उत्पादों को स्थायी बाजार प्राप्त होगा तथा प्रदेश की समग्र अर्थव्यवस्था को व्यापक मजबूती मिलेगी।

   

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