Category: सम्पादकीय

परखने की शक्ति को तीव्र करने की हैं जरूरत

देहरादून (मनोज श्रीवास्तव): परखने की शक्ति, निर्णय करने की शक्ति और धारण करने की शक्ति । जिस व्यक्ति को, जिस समय, जिस विधिपूर्वक सहयोग या शिक्षा चाहिए, अगर परखने की…

सत्यता की निशान है सभ्यता

  देहरादून (मनोज श्रीवास्तव): आजकल एक विशेष भाषा बहुत यूज़ करते हैं कि हमसे असत्य देखा नहीं जाता, असत्य सुना नहीं जाता, इसलिए असत्य को देख झूठ को सुन कर…

सत्य और असत्य का विशेष अन्तर

  देहरादून : सत्य  से किनारा होने के कारण बुद्धि असत्य को सत्य, रांग को राइट मानने लगती है, उल्टी जजमेंट देने लगती है। कितना भी कोई समझायेगा कि यह…

हर कार्य में ईमानदारी और वफादारी अर्थात ऑनेस्टी

  देहरादून : ऑनेस्ट आत्मा को स्वत: ही दूसरे के  प्यार का अनुभव होगा। बड़ों का, चाहे छोटों का, चाहे समान वालों का, विश्वास-पात्र अनुभव होगा। ऐसे प्यार के पात्र…

महिलाओं के बिना नही की जा सकती हैं समाज की कल्पना, समाज और कानूनी अधिकारों की दरकार

  कोटद्वार (डॉ. तनु मित्तल): कहते हैं कि महिलाएं समाज का एक बहुत महत्वपूर्ण व ज़रूरी हिस्सा हैं जिनके बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पर क्या…