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- मुख्यमंत्री के ‘नशा-मुक्त उत्तराखंड’ विज़न को साकार करने ज़िला प्रशासन ने उठाए सख़्त कदम।
- किसी भी छात्र के ड्रग-पॉजिटिव पाए जाने पर कॉलेज डीन/प्रिंसिपल पर भी FIR और कानूनी कार्रवाई तय।
देहरादून : जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में देहरादून जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ ज़ोरदार मुहिम छेड़ दी है। रविवार को यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (UPES) में बड़े स्तर पर छात्र-छात्राओं की ड्रग टेस्टिंग की गई। यह अभियान अब जिले के सभी स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में रोस्टर के आधार पर लगातार चलेगा।
मुख्य फैसले और निर्देश
- अगर किसी संस्थान में कोई छात्र ड्रग-पॉजिटिव पाया गया तो संबंधित डीन/प्रिंसिपल/संस्थान स्वामी के खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
- सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग्स कमेटी अनिवार्य, जिसमें एक छात्र और एक छात्रा को भी शामिल करना ज़रूरी।
- स्कूल-कॉलेज के आसपास और संवेदनशील इलाकों में CCTV लगाने के आदेश।
- रात्रि में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान भी ड्रग टेस्टिंग होगी।
- सभी मेडिकल स्टोर पर 10 दिन के अंदर CCTV अनिवार्य, नहीं लगाने पर लाइसेंस रद्द।
- दवा फैक्टरियों और मेडिकल स्टोर की सघन जांच अभियान शुरू।
नई पहलें
- बच्चों के लिए राज्य का पहला समर्पित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centre) जल्द शुरू होने की प्रक्रिया शुरू।
- रायवाला में 30 बेड का नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से चल रहा है।
- AIIMS ऋषिकेश के साथ MoU – 10 बेड 7 दिन इंटेंसिव थेरेपी के लिए रिज़र्व।
- जिला डी-एडिक्शन सेंटर हेल्पलाइन: 9625777399
हेल्पलाइन: 1933
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा, “नशा अब सिर्फ व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। खासकर किशोरों और युवाओं को इस लत से बचाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए हम ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं।”

