Home उत्तराखण्ड ​कोटद्वार से संयुक्त राष्ट्र तक, कीर्ति शर्मा ने दुनिया के सामने रखा भारत का विजन

​कोटद्वार से संयुक्त राष्ट्र तक, कीर्ति शर्मा ने दुनिया के सामने रखा भारत का विजन

by Skgnews

कोटद्वार : उत्तराखण्ड के छोटे से शहर कोटद्वार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली युवा कृति शर्मा ने अपनी उपलब्धि से शहर और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। कृति ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित यूथ एम्पावरमेंट फोरम (Youth Empowerment Forum) 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक स्तर पर युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन 3 से 6 सितंबर 2026 तक जिनेवा में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में 80 से अधिक देशों के युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कृति शर्मा को इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि (International Delegate) के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

शिक्षा और युवा विकास पर रखे विचार

फोरम के दौरान कृति ने वैश्विक चुनौतियों और युवाओं की भूमिका पर चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने भारतीय युवाओं और शिक्षा से जुड़े अपने विचार साझा किए। सतत विकास, नेतृत्व, युवा सशक्तीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी।

कृति की यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने अपने शहर कोटद्वार से निकलकर ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच हासिल किया, जहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए युवा अपने अनुभव और विचार साझा कर रहे थे।

संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का किया दौरा

जिनेवा प्रवास के दौरान कृति को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को करीब से जानने का अवसर भी मिला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) जैसी संस्थाओं का दौरा किया।

इन संस्थानों को वैश्विक स्तर पर नीति, व्यापार, श्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में जाना जाता है। ऐसे संस्थानों का प्रत्यक्ष अनुभव कृति के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

छोटे शहर से वैश्विक मंच तक का सफर

कृति शर्मा की कहानी उन युवाओं के लिए खास संदेश देती है, जो छोटे शहरों से होने के कारण अपने सपनों की सीमा तय कर लेते हैं। कोटद्वार जैसे शहर से निकलकर जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना दिखाता है कि प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिले तो उसकी पहचान स्थानीय सीमाओं से कहीं आगे तक बन सकती है।कृति की इस उपलब्धि से कोटद्वार में भी खुशी का माहौल है।

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