Home उत्तराखण्ड धर्मपुर के प्राचीन शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर आचार्य सुभाष जोशी ने बताया – संयम, त्याग और तपस्या से ही होती है सिद्धि की प्राप्ति

धर्मपुर के प्राचीन शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर आचार्य सुभाष जोशी ने बताया – संयम, त्याग और तपस्या से ही होती है सिद्धि की प्राप्ति

by Skgnews

देहरादून : धर्मपुर चौक स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर में श्रावण मास के अवसर पर आयोजित दिव्य एवं भव्य संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के तृतीय दिवस पर कथा व्यास एवं शिव आराधक आचार्य सुभाष जोशी ने श्रद्धालुओं को श्री शिव महापुराण के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक महत्व का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि संयम, त्याग और तपस्या ही जीवन में वास्तविक सिद्धि प्राप्त करने का आधार हैं। उन्होंने कहा कि श्री शिव महापुराण धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति कराने वाला वेदकल्प पुराण है, जिसका सर्वप्रथम प्रणयन स्वयं भगवान शिव ने किया था।

आचार्य सुभाष जोशी ने कहा कि भगवान शिव की आराधना के लिए श्रवण, कीर्तन और मनन तीनों साधन वेदसम्मत, सरल और अत्यंत प्रभावशाली हैं। यदि मनुष्य श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव के साथ इनका पालन करे तो वह आध्यात्मिक उन्नति के साथ जीवन के अनेक कष्टों से भी मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

‘नारद मोह’ प्रसंग से अहंकार त्यागने की सीख

कथा प्रसंग के दौरान आचार्य ने श्रद्धालुओं को ‘नारद मोह’ की प्रेरणादायी कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद मुनि के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया। उन्होंने अपनी इस विजय का उल्लेख भगवान शिव, ब्रह्मा और भगवान विष्णु के समक्ष किया। भगवान शिव ने उन्हें इस प्रसंग का प्रचार न करने की सलाह दी, लेकिन अहंकार के कारण नारद मुनि उस सीख को आत्मसात नहीं कर सके।

आचार्य ने आगे बताया कि राजा शीलनिधि की पुत्री के स्वयंवर में नारद मुनि उसके रूप पर मोहित हो गए और भगवान विष्णु से ‘हरि’ स्वरूप प्रदान करने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने उनके वास्तविक कल्याण के उद्देश्य से उन्हें वानर मुख प्रदान कर दिया। स्वयंवर में राजकुमारी द्वारा किसी अन्य को वरमाला पहनाए जाने और उपस्थित लोगों द्वारा उपहास किए जाने पर जब नारद मुनि ने जल में अपना वानर रूप देखा, तब उनका अहंकार और मोह दोनों समाप्त हो गए।

आचार्य सुभाष जोशी ने कहा कि यह प्रसंग मनुष्य को सिखाता है कि अहंकार विवेक को नष्ट कर देता है, जबकि विनम्रता, आत्मचिंतन और भगवान की शरण ही सच्चे ज्ञान एवं आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

भक्ति और भजनों से गूंजा मंदिर परिसर

कथा के दौरान भगवान शिव के विभिन्न दिव्य चरित्रों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। भजन-कीर्तन और शिव महिमा के गायन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ कथा का रसपान किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष सीताराम भट्ट, देवेन्द्र अग्रवाल, दीपक शर्मा, आत्माराम शर्मा, मदन हुरला, सुनील कौशिक, संदीप कुमार, प्रमोद शर्मा, सुदेश हुरला, अर्चना ठाकुर, शर्मिला भट्ट, संगीता खन्ना, अन्नू, मंजू सहित मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर पुण्यार्जन प्राप्त किया।

related posts