मंगलवार को कांसुवा गांव को रवाना होंगी
गोपेश्वर (चमोली)। श्री नंदादेवी राजजात की मनौती के लिए छिमटा गांव के राजशिल्पी छंतोली लेकर आदिबद्री धाम पहुंच गए हैं। आदिबद्री धाम में छंतोली का श्रृंगार होने लगा है। बताते चलें कि नंदादेवी राजजात यात्रा के लिए छिमटा गांव के राजशिल्पी ही छंतोली तैयार करते हैं। छंतोली को तैयार कर राजशिल्पी आदिबद्री ले आए हैं। छंतोली को कांसुवा के राजकुंवरों के सुपुर्द कर दिया गया है। छिमटा गांव के राजशिल्पियों को ग्रामीमों ने दही और मिश्री खिलाकर मंगल गीतों के साथ विदा किया। प्रधान नारायण सिंह नेगी के नेतृत्व में ग्रामीण राजशिल्पियों संग आदिबद्री पहुंचे। आदिबद्री वसुधारा में पहुंचकर राजशिल्पियों ने वसुधारा के जल को छिडक कर छंतोली की शुद्धि की। इसके बाद महिला और पुरुषों की टोली गाजे बाजों संग मांगल गीत गाते हुए आदिबद्री पहुंचे। यहां आदिबद्री, जुलगढ तथा अन्य गांवों के ग्रामीणों ने राजशिल्पियों का स्वागत सत्कार किया। इसके बाद राजशिल्पियों ने मनौती की छंतोली कांसुवा से आए चंद्रकिरण कुंवर, जय विक्रम कुंवर, भूपेंद्र कुंवर तथा नरेंद्र कुंवर को सौंपी।
चंद्रकिरण कुंवर ने बताया कि आदिबद्री के विनोद शाह के घर पर छंतोलियों का श्रृंगार किया जा रहा है। कहा कि छंतोलियों का ही राजजात की मनौती को विशिष्ट महत्व है। मंगलवार को छंतोली की आदिबद्री मंदिर में पूजा अर्चना की जाएगी और इसके बाद छंतोली कांसुवा गांव को रवाना होंगी। बुधवार को छंतोली नौटी पहुंच जाएंगी। 23 जनवरी को नौटी में पूजा अर्चना के पश्चात छंतोली को शेलेश्वर शिवालय में रख दिया जाएगा। इसके जरिए ही भगवान शिव को नंदा राजजात आयोजित करने का संदेश दिया जाता है। वैसे यह मनौती इस साल के लिए होनी थी किंतु अब इसी मनौती को अगले साल की राजजात के लिए माना जाएगा।
इस दौरान छिमटा की अनीता देवी, बसंती, धर्मसिंह, धन सिंह, रिंकी, मंजू, मीना, बिंदी देवी, लीला देवी आदि कार्यक्रम में शामिल रहे।

