देहरादून: उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद अब रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल भाजपा में शामिल हो सकते हैं. चर्चा है कि, कोठियाल अगले एक-दो दिन में भाजपा का दामन थाम सकते हैं. चंपावत उपचुनाव से पहले वह अपने समर्थकों के साथ भाजपा जॉइन कर सकते हैं. बता दें कि,  विधानसभा चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी का सीएम चेहरा रहे कोठियाल ने हाल ही में आप (AAP) से इस्तीफा दे दिया था और इसी के साथ उनके सैकड़ों समर्थकों ने भी पार्टी से इस्तीफा दिया. हालाँकि इसके बाद उन्होंने एक बयान देकर साफ़ किया था कि वे राजनीति में बने रहेंगे.

इस्तीफे के बाद कोठियाल ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि, वह सामाजिक कार्य पूरे जज्बे के साथ जारी रखेंगे और किसी न किसी पॉलिटिकल प्लेटफार्म पर रहना है, क्योकि राजनीति में रहकर आप चीज़ों को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हो. उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने को लेकर जल्द फैसला लेने की बात कही थी. इसके लिए वह अपने करीबी जानकारों से विचार-विमर्श करेंगे. साथ ही अगले कुछ दिनों में मीडिया के जरिये अपने विस्तृत फैसले की जानकारी देने की भी बात कही थी.

रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल ने 18 मई 2022 को AAP पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को इस्तीफा भेजा. कोठियाल ने केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा है कि, पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्ध सैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मैं आम आदमी पार्टी की सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं.

इससे पहले विधानसभा चुनाव 2022 से पहले कोठियाल ने 20 अप्रैल 2021 को आम आदमी पार्टी ज्वॉइन की थी. 17 अगस्त 2021 को आम आदमी पार्टी ने भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी कर्नल अजय कोठियाल को उत्तराखंड में अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था. हालाँकि गंगोत्री विधानसभा सीट से उन्हें करारी झेलनी पड़ी. यहाँ तक कि वे अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे. उन्हें केवल 6161 वोट मिले थे.

26 फरवरी 1969 को गुरदासपुर में जन्मे कर्नल कोठियाल उत्तराखंड के टिहरी जिले के ग्राम चौंफा के रहने वाले हैं. कोठियाल की शुरुआती शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल देहरादून से और कॉलेज की पढ़ाई डीएवी पीजी कॉलेज से हुई है. कोठियाल अविवाहित हैं, उन्होंने शादी नहीं की. 1992 में कोठियाल सेना में अधिकारी के तौर पर शामिल हुए.  कर्नल कोठियाल 1999 में पाकिस्तान के साथ करगिल में हुई लड़ाई में भारतीय सेना की तरफ से लड़ चुके हैं. उनके साहस और वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल सम्मान दिया है.

रिटायर्मेंट से पहले वो उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनीयरिंग के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं. इस क्षेत्र के युवाओं को पर्वतारोहण से लेकर सेना में भर्ती होने के लिए मोटिवेट भी किया. वहीं, कोठियाल की संस्था यूथ फाउंडेशन की नीव भी गंगोत्री से ही पड़ी थी. यूथ फाउंडेशन युवाओं को सेना में जाने के लिए मुफ्त प्रशिक्षण देता है. यूथ फाउंडेशन के सहयोग से बड़ी संख्या में यहां के युवा सेना में भर्ती भी हुए है. कर्नल अजय कोठियाल का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में केदारनाथ पुनर्निर्माण के दौरान आया था. 2013 की आपदा के बाद दोबारा केदारधाम को व्यवस्थित करने के लिए कर्नल अजय ने मोर्चा संभाला था. इसके बाद उनके काम को काफी सराहा भी गया.

By Skgnews