देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती में धांधली के खुलासे के बाद एक और भर्ती की जांच होने जा रही है। विजिलेंस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही भी शुरू कर दी है। 2016 में हुई इस भर्ती परीक्षा में कई गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद इसे रद्द कर 2018 में दोबारा परीक्षा कराई गई थी।

ओएमआर शीट से की गई छेड़छाड़

दरअसल उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने 6 मार्च 2016 को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) के 196 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित कराई थी। इस भर्ती में परीक्षा के बाद ओएमआर शीट (OMR SHEET) 2 हफ्ते तक किसी गुप्त स्थान पर रखकर उससे छेड़छाड़ करने के आरोप लगे, जिसके बाद रिजल्ट जारी हुआ था।

दो सगे भाई बने टॉपर, एक ही गांव के 20 से अधिक युवाओं का चयन

इस भर्ती परीक्षा में दो सगे भाइयों के टॉपर बनने के साथ ही एक ही गांव के 20 से अधिक युवाओं के चयन का भी आरोप लगा। लगातार विवादों में रहने के बाद तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने इस भर्ती परीक्षा की उच्च स्तरीय जांच बैठाई थी। तब आयोग के अध्यक्ष आरबीएस रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 2017 में त्रिवेंद्र सरकार ने इस भर्ती को रद्द करते हुए इसकी जांच बिठाई थी। जांच के आधार पर विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया है।

शिकायत के बाद 2018 में दोबारा हुई भर्ती परीक्षा

वहीं उम्मीदवारों की ओर से 13 याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए एक दिसंबर 2017 को भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दोबारा लिखित परीक्षा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार परीक्षा कराई गई। दूसरी बार हुई इस भर्ती परीक्षा में पहली परीक्षा के चयनित 196 उम्मीदवारों में से केवल 08 उम्मीदवारों का ही चयन हुआ था।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के सचिव संतोष बडोनी ने बताया कि 2016 की वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया है। विजिलेंस की ओर से जो भी दस्तावेज मांगे जाएंगे, वह उपलब्ध कराए जाएंगे।

UKSSSC के अधिकारियों और कर्मचारियों पर हो सकती है कार्यवाही

माना जा रहा है कि, इस जांच के बाद उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के ही तत्कालीन कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही हो सकती है।

By Skgnews

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