मेरे प्यारे प्रवासी भाइयों और बहनों,

आज समस्त विश्व कोरोना वायरस कोविड-19 से ग्रस्त है। यह वैश्विक महामारी है। ऐसे समय में हमें जागरूक रहना है और केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन करना है। जान है तो जहान है। मैं समझ सकता हूं कि दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में आप लोग कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं। प्रदेश सरकार और तमाम सामाजिक संगठन आपकी सकुशल वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुझसे जो भी मदद होगी, मैं भी करने के लिए तैयार हूं।

लेकिन, साथियों, ऐसे कठिन वक्त में आपको अपने साथ ही पहाड़ के आम-जनमानस के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। बेहतर है कि आप पहाड़ में आने से पूर्व मेडिकल जांच करवाने के बाद ही यहां आएं। क्योंकि पहाड़ में मौजूदा समय में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही हैं। ऐसे में यदि कोरोना सवंमित एक भी मरीज यहां पहुंचता है तो यहां की स्थिति विकट हो जाएगी। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से भी छिपी नहीं है। मौजूदा समय में 20 हजार से भी अधिक प्रवासी पौड़ी पहुंच गये हैं जिनके स्वास्थ्य की कोई जांच नहीं हुई है। यह हम सबके के लिए खतरनाक स्थिति है।

मेरा आप लोगों से करबद्ध निवेदन है कि पहाड़ आपका है, आप यहां आएं, लेकिन एक स्वस्थ नागरिक के तौर पर। यदि किसी भी कोरोना का लक्षण दिखे तो वो घबराएं नहीं न ही इसे छिपाएं बल्कि जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचे। यह भी टेस्ट से ही प्रमाणित होगा कि किसी को कोरोना है या नहीं। जल्दबाजी में कोई ऐसा काम न करें जिससे आपको पश्चाताप करना पड़े।

जो लोग अब तक पहाड़ पहुंच चुके हैं भले ही वो स्वस्थ्य हों, लेकिन वो कम से कम 14 दिन तक अपने परिजनों से भी दूर रहें। ग्रामीणों से भी मेरी अपील है कि इस दौर में किसी भी प्रवासी को अपने पैर न छूनें दें, न ही उनकी भुक्की लें और न ही उनके सिर या पीठ पर हाथ रखें। कोरोना जैसी घातक बीमारी से जागरूकता ही बचाव है। आप और आपका परिवार स्वस्थ्य रहें। ईश्वर से ही यही कामना है।
…कवींद्र इस्टवाल

By Skgnews

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