रूडकी : शिक्षा के क्षेत्र में मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा एक ऐसा नाम है जो अपनी विशिष्ट कार्यशैली और व्यवहार के साथ- साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे है प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को सही मार्गदर्शन कर उन्हें नई दिशा दे रहे हैं। प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा आप अपनी इसी कार्यशैली के चलते किसी पहचान के मोहताज नही है।  ग्रामीण क्षेत्र में अशिक्षा के अंधकार को मिटाने के लिए महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। कई सालों से लगातार बच्चों को शिक्षा देते आ रहे प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने ग्रामीण बच्चों को आधुनिक तरीके से शिक्षित करने का प्रयास शुरू किया है। उन्होंने बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया है। 14 अक्टूबर 2015 को मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद विश्वविद्यालय में छात्रों के हित में अभूतपूर्व कार्य किये गये हैं। मदरहुड विश्वविद्यालय के छात्र आज आर्मी, उच्च शिक्षा एवं लीगल सहित विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों ने अपनी अलग पहचान बनाई हैं। मदरहुड विश्वविद्यालय का लीगल स्टडीज का छात्र बिग बॉस का विनर रहा इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कवियत्री अनामिका जैन अम्बर भी पीएचडी की स्टूडेंट हैं। वैसे तो प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा के स्टूडेंट ने स्पोर्ट्स, हायर एजुकेशन, कबड्डी, वॉलीवॉल, शूटिंग सहित विभिन्न विधाओं में अपना नाम कमाया हैं। इसके साथ ही कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों पर विशेष फोकस

मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा के द्वारा शहर के बच्चों के साथ – साथ ग्रामीण बच्चों पर विशेष फोकस रखा हैं। उनका मानना हैं कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को सही समय पर सही तरीके से मार्गदर्शन मिल जाएँ तो वह प्रत्येक क्षेत्र में आग बढ़ सकते हैं। प्रो. शर्मा बताते है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों एवं विद्यालयों में कैरियर काउंसलिंग करवाते है और खुद भी जाकर बच्चों को गाइड करते है। जिससे बच्चों को सही कोर्स चुनकर अपने भविष्य को सफल बनाने की प्रेरणा मिलती है।

ग्रामीण बच्चों को जागरूक करने में सफलता

ग्रामीण बच्चों को जागरूक करने में मिली सफलता के बारें में बताते हुए मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा बताते हैं कि कैरियर काउंसलिंग एवं स्थानीय लोगों से बात कर गाँव – गाँव एवं विद्यालयों में लगाये जा रहे कैम्प से बच्चे जागरूक होकर अपने भविष्य को लेकर कोर्स कर रहे है और उसमें सफल हो रहे हैं।

विश्वविद्यालय में इंग्लिश स्पीकिंग और पर्सनैलिटी डवलपमेंट कोर्स

मदरहुड विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को इंग्लिश स्पीकिंग और पर्सनैलिटी डवलपमेंट जैसे कोर्स कराकर उनकी स्किल को सुधरा जा रहा हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में बच्चों की इंग्लिश स्पीकिंग  और पर्सनैलिटी डवलपमेंट जैसे कोर्स निशुल्क रूप से संचालित किये गये हैं। जिससे बच्चों को स्किल को सुधारा जा रहा हैं। करियर के कई विकल्‍प हैं। जरूरत उनके अनुसार खुद को तैयार करने की है। आज सामान्‍य पढ़ाई के साथ अगर तकनीक का साथ लिया जाए तो करियर को नई दिशा मिल सकती है। कोर्स के बारे में जानकारी देते हुए मदरहुड यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने कहा कि इस कोर्स को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग में छात्रों को सामान्य बोलचाल की इंग्लिश सिखाई जाएगी। वहीं दूसरे भाग में छात्रों की पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें छात्रों को सिखाया जाएगा कि वे तनाव को कैसे कम करें और इंटरव्यू आदि परिस्थितियों में किस प्रकार व्यवहार करें।

विश्वविद्यालय में प्रोफेसनल कोर्स का शुरू करना

वीसी प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि यूजी और पीजी के लिए नये कोर्स शुरू किए गये हैं। नए कोर्स रोजगार-उन्मुख और पेशेवर पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। कुलपति ने बताया कि समय के साथ बदलती जरूरतों के मद्देनजर पहली बार मदरहुड विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी दोनों स्तर पर मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी बीएड, बीए बीएड, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम,बीकॉम एलएलबी, बीए एलएलबी, बीबीए एलएलबी ऐसे कोर्स हैं जो कम समय में पुरे हो जाते हैं। विश्वविद्यालय में ग्रामीण एवं आजकल के परिवेश को देखते हुए रोजगार – उन्मुख कोर्स चलाये जा रहे हैं। जिससे बच्चे लगातार शिक्षा लेकर अपना कोर्स पूरा कर भविष्य उज्ज्वल कर रहे हैं।   कुलपति ने कहा कि यह कोर्स मदरहुड विद्यार्थियों के रोजगार का आधार बनेगे।

पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा बहुत जरूरी

नैतिक शिक्षा की आज के युग में बहुत जरूरत हैं। संस्कारों और नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाना बेहद आवश्यक हैं। बच्चों में शिक्षा के साथ ही संस्कारों का भी बीजारोपण होना चाहिए। संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। आज के इस भौतिक युग में संस्कार शाला का संचालन होना अत्यंत आवश्यक है। उक्त बातें मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र शर्मा ने कही। आदर्श समाज की स्थापना संस्कार से ही शुरू हो सकती है। प्रो. नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र का निर्माण करना होता है। नैतिक शिक्षा से नैतिकता आएगी। नैतिक मूल्यों की कमी ही समाज के हर समस्या का मूल कारण है। वहीं नैतिक मूल्यों एवं उच्च आदर्शों से बच्चे का आत्मविश्वास व आत्मचेतना भी मजबूत होती है। वीसी डॉ. नरेन्द्र शर्मा ने कहा कि समाज में व्यक्ति दो चीजों से पहचाना जाता है। पहला ज्ञान और दूसरा उसका नैतिक व्यवहार। व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए भी यह दोनों ही अति आवश्यक है। नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है, जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।

ऑनलाइन शिक्षा कितनी सही है

वीसी प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा बताते हैं कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र ग्रामीण क्षेत्र,मध्यम वर्गीय या निर्धन परिवारों की पृष्ठभूमि से आते हैं। छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा यदि दी जाती है, तो छात्रों का ज्ञानात्मक विकास तो हो जाएगा लेकिन व्यावहारिक व भावनात्मक विकास थम जाएगा। कंप्यूटर छात्रों को सिर्फ बौद्धिक दे सकता है, लेकिन शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता। एक शिक्षक ही छात्रों को विषय ज्ञान के साथ ही अनुशासन, शारीरिक, मानसिक नैतिक व भावनात्मक विकास का सृजनकर्ता होता है।

सोशल मीडिया का शिक्षा पर प्रभाव

कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया का विद्यार्थियों पर दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। इसका अच्छा प्रभाव यह हैं कि कोई भी जानकारी ससमय इससे दी जा सकती हैं और इससे समय की बचत के साथ मैसेज सही रूप में विद्यार्थियों तक पहुंच जाता हैं। कुलपति कहते हैं कि सोशल मीडिया के दुरूपयोग से बचना चाहिए। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपने विचारो को साझा कर नई बौद्धिक दुनिया का निर्माण कर रहे हैं। यहां लोगों को अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वंत्रता होती है जो लगभग एक दशक पहले इतना आसान नहीं था। इसने विश्व में संचार को एक नया आयाम दिया है। आज फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूटयूब एवं व्हाट्सएप का उपयोग व्यापक रूप से किया जा रहा है। कुलपति बताते हैं कि दुनिया के दूर किसी कोने में बैठे व्यक्ति से संपर्क करना, अपने विचारों को दूसरो तक पहुंचना, देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त करना, ये सब मिनटों में संभव है। सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज बना है जो समाज की मुख्यधारा से अलग है एवं जिनकी आवाज को दबाया जाता रहा है। हालांकि यहां कई बार अनिश्चित प्रकृति, अफवाहों को हवा देना , किसी विशेष एजेंडा को हवा देना, गलत समाचारों को दुनिया भर में फैलाना, चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने एवं लोकतंत्र के मूल्यों से समझौता करने की तरफ भी लेकर जाता है। मदरहुड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही प्रभाव होते हैं। यह आदमी के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इसका उपयोग कितना और किस तरह से करता है। यह पूर्णतयः हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह अपने जीवन में सोशल मीडिया का उपयोग करके बदलाव ला सकते हैं।

विश्वविद्यालय ने तेजी से प्रगति की

कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जो प्रगति की हैं वह मेरे अकेले के द्वारा किये गये कार्यों का परिणाम नही हैं । यह सब टीम वर्क का नतीजा हैं और बिना टीम वर्क के कोई भी कार्य नही किया जा सकता हैं। विश्वविद्यालय में प्रत्येक कार्मिक द्वारा टीम वर्क की भावना को रखकर कार्य किया जाता हैं। जिसके सुखद परिणाम मिलते हैं और यहीं विश्वविद्यालय के प्रगति का मूल मंत्र हैं।

स्वच्छता एवं नशे के दुष्प्रभाव को लेकर जागरूक करना

कुलपति ने बताया कि वह स्वच्छता को लेकर लगातार कार्यक्रम कर विद्यार्थियों को जागरूक करते हैं और स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ भारत का नदेश देने का कार्य करते हैं। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में पुरे वर्ष स्वच्छता कार्यक्रम चलाये जाते हैं। स्वच्छता के लिए मदरहुड विश्वविद्यालय को भारत सरकार से स्वच्छता प्रमाण पत्र भी मिला हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा एड्स दिवस मनाया जाता हैं। जिसमें एड्स के प्रति जागरूक किया जाता हैं। साथ ही विश्वविद्यालय के वीसी प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र शर्मा ने बताया की युनिवर्सिटी में नशे के दुष्प्रभाव को लेकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जाता हैं। नशे के प्रभाव में व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती हैं। किसी भी नशे को अपनी प्रबल इच्छा शक्ति से स्वयं को शिकार बनने से रोक सकते है। कहा कि नशा करने से शरीर को अंदर से नुकसान होता है। जिसस व्यक्ति में कमजोरी आने लगती है। ऐसे में वह थोड़ा-सा काम करने पर भी थक जाते है। ड्रग्स का सेवन या ड्रग्स की लत एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्या है जो न केवल पूरे विश्व के युवाओं को प्रभावित करती है बल्कि विभिन्न आयु के लोगों को भी प्रभावित करती है। यह व्यक्तियों और समाज को कई क्षेत्रों में नष्ट कर देती है। विश्वविद्यालय के द्वारा लगातार विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणाम के बारें में बताकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जाता हैं।

विश्वविद्यालय द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान

मदरहुड विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण सरंक्षण के लिए लगातार पौधारोपण किया जाता हैं। और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता हैं। कुलपति प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा से विद्यार्थियों को अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रयासरत रहने का आग्रह किया। पर्यावरण संवर्धन हेतु परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने को लेकर कार्य किया गया। साथ ही बताया कि प्रकृति के साथ सद्भावना से रहने एवं उसके संरक्षण में अपना योगदान दे और भविष्य में जैव विविधता बढ़ाने एवं संरक्षित करने की योजनाओं पर भी बताया। कुलपति ने कहा कि पेड़ मनुष्य के जीवन का मूल आधार है। मनुष्य का पेड़ो से बहुत गहरा सम्बन्ध है, इसलिए हम सब को अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाने चाहिए ताकि आने वाले समय मे हमे साफ़ वायु, छाया आदि प्रदान कर सके। पेड़ो से पर्यावरण भी स्व्च्छ रहता है। इनसे बहुत सी दवाइयां और विभिन्न प्रकार की औषधियां बनाई जाती है, जो मनुष्य की सेहत के लिए लाभदायक होती है।

मदरहुड विश्वविद्यालय में हर्बल गार्डन

मदरहुड विश्वविद्यालय में एक हर्बल गार्डन तैयार किया गया हैं। जिसमें लगभग 300 औषधीय प्रजाति के पौधे लगाये गये हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में बीएएमएस का कोर्स संचालित हैं। जिसमे स्टूडेंट को औषधीय पेड़ पौधों के बारें में जानकारी एवं उनके उपयोग के बारें में बताने के लिए परिसर में एक हर्बल गार्डन तैयार किया गया हैं। हर्बल गार्डन में एलोविरा, नीम तुलसी, निम्बू सहित विभिन्न 300 प्रजातियों के पेड़ पौधे लगाये गये हैं।  कुलपति ने बताया कि हर्बल गार्डन से विश्वविद्यालय का वातावरण तो अच्छा होगा ही साथ ही बच्चों को इन पौधों के बारे में जानने और समझने का भी मौका मिलेगा।

मील का पत्थर साबित होगी नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति के विषय पर प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर भी बहुत जोर दिया गया है जिससे बच्चों में कार्य दक्षता बढ़ेगी। भारत की नई शिक्षा नीति के तहत स्टूडेंट को एक बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि इसमें व्यवसायिक प्रशिक्षण इंटर्नशिप को भी आरंभ कर दिया जाएगा । नई शिक्षा नीति में शिक्षा मातृभाषा या फिर क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा प्रदान की जाएगी, यानी पांचवी कक्षा तक छात्र अपनी भाषा में ही पढ़ाई कर सकते हैं । नई शिक्षा नीति में स्किल्ड बेस शिक्षा पर जोर दिया गया हैं। नई शिक्षा नीति को लागु करने में शुरूआती दौर में कठिनाई हो सकती हैं। लेकिन भविष्य में यह मील पत्थर साबित होगी। नई शिक्षा नीति युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बढ़ाया गया एक कदम है। उन्होंने कहा कि यह देश के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति से छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जाएगी। नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा और वह अपने जीवन में स्वावलंबी हो सकेंगे।

 

By Skgnews