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NPS के विरोध में कर्मचारियों ने मनाया काला दिवस, पुरानी पेंशन बहाली के लिए निर्णायक होगा नया साल

01-01-2021 16:15:46 By: एडमिन

कोटद्वार । राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन को बंद कर NPS व्यवस्था को लागू किया गया था। जिसके विरोध में समस्त NPS आच्छादित कर्मचारी लामबंद हुए। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली सँयुक्त मोर्चा के आह्वाहन पर राज्य में पुरानी पेंशन को बन्द किये जाने व NPS योजना को लागू किये के विरोध में हज़ारों  राजकीय  कर्मचारियों में काला दिवस मनाया। कर्मचारियों ने अपने कार्यलयों में  काली पट्टी व काला मास्क लगाकर विरोध जताया, सभी कर्मचारियों ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर काली रखी, एक साथ 80 हज़ार कर्मचारियों ने शाम 3 से 6  बजे nps के विरोध में और पुरानी पेंशन की बहाली के लिए लाखों ट्वीट किये । कर्मचारियो का कहना है 1 जनवरी 2004 को तत्कालीन  सरकार ने NPS योजना को लागू कर कर्मचारियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया। प्रत्येक कार्मिक ने काला दिवस का अपने कार्यालय से पूरी शिद्दत से प्रतिरोध किया और उम्मीद जताई कि कर्मचारियों की आवाज़ अब सुनी जाएगी।

प्रदेश अध्यक्ष अनिल बडोनी ने कहा कि वर्तमान समय मे कर्मचारी संयुक्त मोर्चा राज्य में पुरानी पेंशन की लड़ाई मजबूती से लड़ रहा है। राज्य के इतिहास में पहली बार सम्पूर्ण केबिनेट कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की पक्षधर हो गयी है। संयुक्त मोर्चा ने व्यक्तिगत रूप से NPS की खामियों से अवगत कराते हुए उन कोरोना शहीदो का वास्ता दिया जो इस NPS योजना के तहत आच्छादित थे और जिन्हें नाम मात्र की धनराशि इस पेंशन योजना के तहत प्राप्त हुई। आशा है कर्मचारियो की इस लगातार उठती मांग को देखते हुए अब सरकार पुरानी पेंशन को लागू करेगी। कर्मचारी सरकार के अंग हैं। अगर सरकार अपने अंगों का ख्याल नही रखेगी तो स्वाभाविक है वह कमज़ोर  सिद्ध होगी।

प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि प्रत्येक मांग आग्रह से शुरू होती है और आंदोलन पर खत्म। लेकिन यह मांग तब तक खत्म नही होगी जब तक यह लागू नही हो जाती। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली सँयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत जी के नेतृत्व में लगातार कई राज्यों में इस लड़ाई को लड़ रहा है जहां सफलता प्राप्त होने के आसार हैं। वर्तमान में राज्य और केंद्र दोनो में एक ही सरकार है जिसने अतीत में ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। यह भी कर्मचारियों के जीवन से जुड़ा एक ऐतिहासिक निर्णय सिद्ध होगा। हम अन्य मांगों को पुरानी पेंशन के साथ उलझाकर एक नया विपक्ष नहीं तैयार करना चाहते। हमें एम एल सी / एम एल ए के चुनाव नही लड़ने हैं लेकिन हम और हमारे परिवार आने वाले चुनावों में वोट जरूर करेंगे।हम कर्मचारी हैं हम अपनी इस एक सूत्रीय मांग को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए कुछ भी कर गुज़र सकते हैं।

प्रदेश महिला उपाध्यक्ष योगिता पन्त ने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली के लिये महिला कार्मिक घरों से निकल कर सड़को पर आने के लिए तैयार हैं । क्योंकि यह मामला सीधा घरों को आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। इसलिए अब आर पार की लड़ाई के लिए हम रियर हैं।मंडलीय अध्यक्ष जयदीप रावत ने बताया कि सभी NPS कार्मिक इस अन्याय के खिलाफ हैं। शीघ्र सरकार इस सम्बंध में कोई निर्णय ले अन्यथा की स्थिति कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भयावह होगी। इसलिए अब लड़ाई निर्णायक होती जा रही है।  प्रदेश स्तर से देवेंद्र बिष्ट, प्रवीण भट्ट, योगिता पंत , भवान सिंह नेगी जैसे जुझारू पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अपना निर्णायक योगदान दिया।कुमाउं से कपिल पांडे, राजीव कुमार, रेनु डांगला, सुबोध कांडपाल, राजेन्द्र शर्मा, अशोक पंत, आलोक पांडे, अनिल जोशी, शंकर सिंह नायक,

गढ़वाल से जयदीप रावत , सोहन सिंह नेगी, प्रेमचंद ध्यानी, राकेश रावत, श्रीकृष्ण उनियाल,  जसपाल रावत ,नरेश भट्ट, भवान सिंह नेगी, कमलेश कुमार मिश्रा, सौरभ नौटियाल, गौरी नैथानी, महेश गिरि, श्री कृष्ण उनियाल, मुकेश बहुगुणा, संजय भाष्कर, दिवेन्द्र डोंडिया, पंकज बिष्ट, अजय रावत,  इत्यादि ने कार्यक्रमो का संचालित किया।पुरानी पेंशन के लिए कोरोना काल को देखते हुए कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन के लगातार आंदोलन प्रदर्शन कार्यक्रम जारी रखने का निर्णय लिया है  ।